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राम मंदिर ध्वजारोहण 2025 : राम मंदिर के ध्वज पर अंकित ‘ॐ’ सहित तीन विशेष चिन्ह, जानें उनका धार्मिक महत्व

अयोध्या।
रामनगरी अयोध्या में 2025 में होने वाला राम मंदिर ध्वजारोहण सिर्फ़ एक परंपरा भर नहीं, बल्कि सनातन आस्था का अत्यंत पवित्र और भावनात्मक क्षण माना जा रहा है। रामलला के परम धाम पर फहराया जाने वाला यह राम ध्वज अपने भीतर गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक परंपरा और दिव्यता का संदेश समेटे हुए है। इस ध्वज पर ‘ॐ’ के साथ तीन विशेष चिन्ह अंकित किए गए हैं, जिनका धार्मिक महत्व अत्यंत गूढ़ और शुभ माना जाता


राम मंदिर के ध्वज पर बने तीन विशेष चिन्ह

राम मंदिर के प्रमुख ध्वज पर निम्न तीन चिन्ह विशेष रूप से अंकित किए गए हैं—

1. ॐ (ओंकार)

  • यह ब्रह्मांड का मूल नाद माना गया है।
  • ‘ॐ’ ईश्वर की सर्वव्यापकता, सृष्टि के आरंभ और अनंत ऊर्जा का प्रतीक है।
  • रामलला के ध्वज पर इसका अंकन यह संदेश देता है कि भगवान राम की शक्ति समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त है।

2. धनुष-बाण

  • मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के साहस, धर्म–संरक्षण और न्यायप्रियता का प्रतीक।
  • यह दर्शाता है कि प्रभु राम सदैव धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए तत्पर रहते हैं।
  • राम मंदिर पर धनुष-बाण का चिन्ह रामराज्य के आदर्शों का स्मरण कराता है—जहाँ सुरक्षा, न्याय और करुणा सर्वोपरि थे।

3. सूर्य चिह्न

  • भगवान राम को सूर्यवंश का अवतार माना जाता है।
  • सूर्य ऊर्जा, प्रकाश, ज्ञान और सत्य का प्रतीक है।
  • ध्वज पर सूर्य का अंकन यह बताता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, सत्य और धर्म का प्रकाश अंततः विजय पाता है।

रामध्वज का अर्थ — अयोध्या में राम ध्वजा का आध्यात्मिक महत्व

राम मंदिर में फहराई जाने वाली राम ध्वजा भक्ति, शक्ति और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है।इसका अर्थ सिर्फ़ एक ध्वज से कहीं अधिक विस्तृत है—यह भगवान राम की उपस्थिति का संकेत देती है।ध्वजा को विजय, शौर्य और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना गया है।मंदिर के शिखर पर ध्वज फहरना दर्शाता है कि यहाँ धर्म का शासन और प्रभु की कृपा सदा बनी रहेगी।सनातन परंपरा में ध्वज को देवता की आकाशीय पहचान भी माना जाता है—जहाँ ध्वज लहराता है, वहाँ दिव्यता निवास करती है।

लोगों और संत समाज में क्यों है उत्साह?

राम मंदिर ध्वजारोहण को लेकर देश भर में संत समाज और श्रद्धालु विशेष उत्साहित हैं, इसके तीन प्रमुख कारण हैं—

1. युगों बाद पूर्णता का भावराम मंदिर का निर्माण सदियों की प्रतीक्षा और संघर्ष का परिणाम है। ध्वजारोहण उस स्वप्न की पूर्णता का प्रतीक है, जिसमें करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।

2. आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्रध्वज पर अंकित चिन्हों को शक्ति, संरक्षण और कल्याण का वाहक माना जाता है। ध्वजा फहरने से मंदिर की आध्यात्मिक तेजस्विता और अधिक बढ़ती है, ऐसा मानना है।

3. सनातन संस्कृति के उत्कर्ष का क्षणयह ध्वजारोहण केवल अयोध्या का नहीं, बल्कि दुनिया भर में बसे सनातनियों के लिए अपनी संस्कृति और आध्यात्मिकता की पुनर्स्थापना का भाव जगाता है।

समापन

2025 का राम मंदिर ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था की विजय का ऐतिहासिक पर्व है।
‘ॐ’, धनुष-बाण और सूर्य चिह्नों से अलंकृत यह ध्वज—
धर्म, शक्ति, सत्य और मर्यादा के संदेश को विश्व भर में प्रसारित करेगा।

अयोध्या की पवन धरा पर लहराती रामध्वजा करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ़ भावनाओं का प्रतीक नहीं, बल्कि यह घोषणा है कि—
धर्म अमर है, और राम नाम अनंत।

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